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अत्यंत हर्ष का विषय है कि कुलपति डॉ इंद्रनील मन्ना के आदेश द्वारा राजभाषा प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। वर्ष १९५५ में दूरदर्शी उद्योगपति श्री बी एम बिरला के एक सार्थक प्रयास के कारण संस्थान की उत्पत्ति हुई जिसका उद्देश्य युवा वर्ग की कल्पना को उड़ान देना था। ६० वर्षों से भी अधिक के इतिहास में हमारे संस्थान ने शैक्षणिक उत्कृष्ठता की विरासत को न सिर्फ समृद्ध किया है अपितु सीखने के ढांचे को भी विकसित किया है। इसी कड़ी में हमे राजभाषा प्रकोष्ठ को अपने सार्थक प्रयासों से  आगे ले जाना है। राजभाषा अधिनियम ३.३ के अनुसार दस्तावेजों को हिन्दी में परिवर्तित किए  बिना राजभाषा अधिनियम का अनुपालन संभव  नहीं है।

भारतीय  संविधान में हिन्दी को राजभाषा का पद दिया गया है। साथ ही राज्यों  को यह अधिकार  भी दिया गया है कि वे अपनी छेत्रीय भाषाओं को अपने प्रदेशों में प्रयोग कर सकता है, जिसे सभी में सामंजस्य  बना रहे। राजभाषा प्रकोष्ठ का भी यह प्रयास रहेगा कि सभी भाषाओं के सम्मान के साथ, हम सभी  हिन्दी में आसानी से काम कर सकें और संस्थान को उन्नति के पथ पर अग्रसर करें। आप सभी के सहयोग के बिना यह कार्य संभव नहीं है। हम सभी के रचनात्मक सुझावों का खुले दिल से न केवल स्वागत करेंगे, अपितु सत्यनिष्ठा  से समाहित भी । कुलसचिव महोदय का सहयोग भी लगातार मिल रहा है।

इस वेबपेज का उद्देश्य है कि आपको समय-समय पर राजभाषा संबंधी कार्यकलापों की सभी जानकारी एक जगह मिल सके और आप जब भी चाहे संपर्क स्थापित कर सकें। आप सभी से निवेदन है की इस कार्य को अपने प्रयासों से आगे बढ़ाए और संस्थान के गौरव को आगे ले जाने में योगदान दें।                                                                      

                                                                                                                                       डॉ पीयूष तिवारी