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Rajbhasha Prakosth  >>  छात्र वर्ग

भयाए मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

रंग रंग के अंग अंग
सँपवा लटकाओल,
ताहि ऊपर भसम रमाय!
रमाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

गंगा बसाओल,
धानी जटा बीच,
भाल पर चंदा सोहाय!
सोहाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

कर में डमरू अरु
साँप के मौरिया,
लागय सपेरा मदाड़!
मदाड़ मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

बाघ के छल्ला सौं
लाज छै झाँपल,
निर्लज नै लाजो लजाय!
लजाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

बरद बसाहा के
भाबय सवारी,
उमतहबा बड़ जोगी राय!
जोगी रे मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

चमकय बड़ बड़ दृग
साथे तिरशुलबा,
देखी करेजबा कँपाय!
कँपाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

 

 

कार्तिक गणपति
दुई जन बालक,
कोरी बैठाई खेलाय!
खेलाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

भांग धतूरा छै
इनका बड़ भाईब,
भंगेरिया व्यंजन नै खाय!
नै खाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

गौरी बजबय छथिन
हिनका बुलाइब,
बौरहबा सुनलो नै जाय!
नै जाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

माँगे मैत्री कर 
जोड़ी अहै वर,
हरियौ हिय मं समाय!
समाय मोरी सखिया,
गौरा के रूप भयाए।

Aparna Shambhawi( मैत्री)